कभी किसी विदेशी को अंग्रेजी में नहीं बता पाए थे संतरे का नाम, निरक्षर होने पर भी खोला स्कूल, नंगे पांव पहुंचे लेने पद्मश्री सम्मान

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सोमवार को भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी। बता दें कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाले व्यक्तियों को पद्मश्री तथा पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। ऐसे में इन दिनों चर्चा का केंद्र बेंगलुरु के संतरे बेचने वाले 64 वर्षीय हरेकाला हजब्बा बने हुए हैं। उन्हें सोमवार को समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए भारत सरकार की ओर से पद्मश्री सम्मान दिया गया। भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद्म श्री सम्मान प्रदान किया।

बता दें कि कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ा के न्यूपाड़ापू गांव के रहने वाले हरेकाला हजब्बा ने अपने गांव में अपनी जमापूंजी से एक स्कूल खोला। इसके साथ ही वह हर साल अपनी बचत का पूरा हिस्सा स्कूल के विकास के लिए देते आ रहे हैं। खास बात यह है कि वह पूरी तरह से निरक्षर है। मंगलुरु के रहने वाले एक अशिक्षित फल विक्रेता हजब्बा ने शहर से 35 किमी दूर अपने गांव न्यूपड़ापू में अपने गांव के बच्चों को शिक्षा देने के लिए एक स्कूल खोला है।

उन्हें शिक्षा का एहसास तब हुआ जब किसी एक विदेशी ने उनसे संतरे का नाम इंग्लिश में पूछा और वह नहीं बता पाए थे। गांव में स्कूल न होने के चलते पढ़ाई न कर पाने वाले हजब्बा ने अपने गांव के बच्चों के दर्द को समझा और साल 1995 में स्कूल की स्थापना की। इसके बाद साल 1999 में सरकार ने उनके विद्यालय को मान्यता प्रदान कर दी थी। बता दें कि अभी उनके स्कूल में केवल प्राथमिक स्तर की पढ़ाई होती है लेकिन भविष्य में उनका सपना अपने गांव में एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज का है। जल्द से जल्द गांव में एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज खुल सके, इसको लेकर वो लगातार तैयारियां कर रहे हैं।