बिहार के मगध इलाकों में काले गेहूं का खेती कर यह किसान हो रहा मालामाल जानिए

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आपने कई बार काली चावल की खेती के बारे में तो काफी बार सुना होगा लेकिन अब बिहार में काली गेहूं की भी खेती शुरू कर दी गई है जिसके बाद किसानों की आमदनी अब दोगुनी होती जा रही है अब काले गेहूं की खेती पटना जिले में धीरे धीरे जोर पकड़ने लगा है नौबतपुर प्रखंड के सोना गांव के युवा किसान रवि रंजन कुमार ने करीब 10 कट्ठा में पहली बार काली गेहूं की खेती की है वही इस काले गेहूं के बारे में अभी फिलहाल गिने चुने किसान ही जानते हैं वहीं अगर गुणवत्ता और मुनाफे की बात करें तो इस मामले में काले गेहूं अब्बल साबित हो रहा है।

काले गेंहू की पैदावार है बेहतरीन
सबसे पहले इस काले गेहूं को राजधानी पटना में उगाने वाले किसान रवि रंजन कहते हैं कि वह काले गेंहू को मसौढ़ी के कोरियामा गांव में 10 किलो बीज दो हजार में लेकर आए थे आपको बता दूं कि इस गेहूं को विकसित नेशनल एग्रो फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट मोहाली पंजाब में किया गया है वहीं गेहूं की बुवाई 8 से 10 किलो प्रति बीघा होता है वही पैदावार की बात करे तो इसकी पैदावार 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है इसमें वर्मी कंपोस्ट और डब्लूडीसी खाद का उपयोग मुख्य तौर पर किया जाता है।

 

सेहत के लिए भी है काफी लाभदायक

किसान रवि रंजन ने गेहूं के बारे में बताया कि खाना खाने के बाद जब हमारे शरीर में ऑक्सीजन किसी अन्य पदार्थ के साथ मिलकर फ्री रेडिकल्स बनाते हैं, इससे त्वचा को नुकसान होता है, त्वचा सिकुड़ने लगती है और लोग जल्दी बुजुर्ग हो जाते हैं. कई बार लोग कैंसर जैसी बीमारी के शिकार हो जाते हैं. अगर यह गेहूं इस्तेमाल करते हैं तो इन बीमारियों से बच सकेंगे.

काला गेहूं में सामान्य गेहूं के अनुसार एनथोसाइनिन की मात्रा अधिक होती है. सामान्य गेहूं में पिगमेंट की मात्रा पांच से 15 पीपीएम होती है, जबकि काले गेहूं में पिगमेंट मात्रा 40 से 140 पीपीएम होती है. एनथोसाइनिन एंटीऑनक्सीडेंट का काम करती है. इसमें जिंक की मात्रा भी अधिक होती है.