बिहार का यह किसान कैसे परंपरागत खेती छोड़ स्ट्रौबरी की खेती करके लाखों रुपए कमा रहा है

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जहां बिहार में किसान की गोभी की फसल ना सही दाम मिलने पर वह खेत में ही उसको भी को जोत देता है तो कहीं पर कृषि को अपनी फसल की सही दाम नहीं मिल रही है लेकिन इसी बीच कुछ किसान परंपरागत खेती को छोड़ अलग अलग तरह की फसल उगा रहे हैं कुटुंबा प्रखंड के ग्राम चिलकी बिगहा के किसान इन दिनों बड़े पैमाने पर एस्ट्रोबेरी की खेती कर रहे हैं.स्ट्रॉबेरी की खेती करने वाले किसान ब्रजकिशोर प्रसाद मेहता ने अपनी खेती प्रणाली के बारे में बताया कि हरियाणा के हिसार जिले में उनका बेटा मजदूरी के लिए गया था, इत्तेफाक से वह स्ट्रॉबेरी की खेतों में मजदूरी करने लगा.समय के साथ-साथ फसल से होने वाले लाभ को समझने के बाद घर आकर उसने इसकी खेती करने की योजना बनाई.

 

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने हिसार से स्ट्रौबरी का कुछ पौधा ट्रायल के तौर पर लगाया जिसके बाद उसमें अच्छी पैदावार और उन्हें अच्छी मुनाफा मिली जिसके बाद उनका और मनुबल बढ़ा फिर क्या था उन्होंने पैदावार को और भी बेहतर बनाने के लिए स्ट्रौबरी के पौधे लाएं जिसके बाद उनकी पैदावार और भी बेहतर होने लगी किसान बताते हैं कि जब सफलता मिली तो मार्केटिंग की समस्या उत्पन्न हो गई. लोकल मार्केट नहीं होने के कारण फसल को पटना और कलकत्ता भेजना पड़ा  अब जिले के 15 किसान इसकी खेती कर रहे हैं. फ़िलहाल 450 रूपए किलो इसे बेच रहे हैं ।