क्या आप जानते है 1930 में भी दशहरा 25 को , 1930 से राजधानी पटना में दुर्गा पूजा का त्यौहार एक सांस्कृतिक कार्यक्रम

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राजधानी पटना सहित पूरे बिहार में अब जहां दुर्गा पूजा बदलते समय के साथ एक अलग अंदाज में मनाया जाता है वही बिहार की राजधानी पटना में 1930 के दशक में दुर्गा पूजा का त्यौहार सांस्कृतिक कार्यक्रम की तरह मनाया जाता था जब इस अवसर पर लोक गीत संगीत कार्यक्रम का आयोजन करते थे नाटक मंच का आयोजन हुआ करता था स्कूल से लेकर घर तक और चौक चौराहे पर शतरंज प्रतियोगिताएं का आयोजन किया जाता था यह सभी चीजें और यह सभी आयोजन अगले दिन सुबह जाकर समाप्त होता था।

वहीं दूसरी तरफ आदित्य ने पीटीआई भाषा से बातचीत में कहा कि हमें 1936 के अमावन और रंग का जो अब झारखंड के पलामू जिले में स्थित है वहां के जमींदार परिवार 1948 से 51 के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री रहे महाराज सर मोहन शमशेर जंग बहादुर राणा द्वारा भेजा गया दुर्गा पूजा के दुर्लभ ग्रीटिंग मिले हैं आपको बता दूंगी इन ग्रीटिंग का दिलचस्प बात यह है कि यह तीनों कार्ड काफी मिलते-जुलते हैं सभी कार्ड में महिषासुर का मां दुर्गा वध करती हुई दिखाई दे रही है आपको बता दूं कि 1930 कि ये सभी ग्रीटिंग्स और यादें नुक्कड़ नाटक आदि यह सभी दस्तावेज हमें उस वक्त के पटना की कल्पना करने में मदद करती है।

वही सबसे दिलचस्प बात यह है जो 1936 में दशहरा 25 अक्टूबर को था और इस साल भी दशहरा मतलब 2020 में भी दसारा 25 अक्टूबर को ही पड़ा है अनेक बुजुर्ग ने बताया कि पुराने समय में दुर्गा पूजा कि वक्त शहर में गीत-संगीत कव्वालियां का दौर चला करता था जो सांस्कृतिक रूप में सम्मिलित पटना की पहचान था वहीं अब राजधानी पटना जिस तरह से बदल रहा है जिस वजह से हर चीजें एक मॉडर्न रूप लेते जा रही है और त्योहारों में इन सभी का जगह मॉडर्न गाना बजाना और काफी अलग तरीकों से दशहरे को मनाने की परंपरा चल चुकी है।