चुनाव आयोग का बिहार चुनाव निर्देश के बाद ,दागी प्रत्याशियों को चुनना आसन नहीं होगा

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समय के साथ-साथ हर चीज में पारदर्शिता आने चाहिए जो किसी भी लोकतंत्र के लिए अच्छा माना जाता है भारत एक विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है यदि समय के साथ उसमे परिवर्तन की बात की गई है जो लो लोक हित में है तो हम कह सकते है की यह भी समय की मांग है अगर बात करे विश्व और अन्य देशो की जहाँ लोक तंत्र है लेकिन उनके संविधान में संशोधन आसन नहीं है जैस कि भारत का है इसलिए तो भारत के संविधान इतना अच्छा बताया गया है | भरत के संविधान लोक हित में समय –समय पर वर्तमान परिस्तिथियों के अनुकूल अपने –आप को अपडेट करने का प्रावधान इसमें है इसलिए मिली ताजा जानकारी के अनुसार लोक हित में चनाव आयोग ने खुछ ऐसा ही निर्णय दिया है जिससे आम जनता के सामने उनके प्रतिनिधिओ की सही जानकी यही लोकतंत्र में परदार्शिता स्पष्ट हो

 

 

अब होने वाले बिहार विधानसभा के चुनाव में दलों को यह बताना होगा अपनी आपराधिक लंबितमुक़दमे को. और उन्हें प्रत्याशी क्यों चुना ? दलों को बाजाप्ते अखबार में यह सूचना प्रकाशित करानी होगी. चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर सभी मान्यता प्राप्त दलों के लिए यह प्रावधान लागू कर दिया है. बिहार में 150 रजिस्टर्ड दलों को निर्वाचन विभाग ने चिट्ठी लिखी है जिनका मुख्यालय पटना है. राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 2543 दलों को पत्र लिखा गया है. निर्वाचन विभाग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश दिया है जिसके आलोक में आयोग ने यह व्यवस्था इस चुनाव में पहली बार लागू की है. इसके तहत कोई भी दल अगर किसी ऐसे व्यक्ति को अभ्यर्थी चुनता है जिसके खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है तो उसको यह बताना होगा कि उसे क्यों चुना ?

 

 

चुने जाने के 48 घंटे के भीतर फॉर्मेट सी 7 में उसे समाचार पत्रों में सूचना देनी होगी. यह सूचना राज्य और राष्ट्रीय अखबार में देनी होगी. साथ ही सूचना प्रकाशित करने के 72 घंटे के अंदर आयोग को फॉर्मेट सी 8 में बताना होगा. इसमें प्रावधान है कि अगर कोई दल इस आदेश का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कंटेम्प्ट प्रोसीडिंग चलाई जाएगी. इनमें से 20 राजनीतिक दलों के मुख्यालय के पते से चिट्ठी वापस हो गई है. चुनाव आयोग ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है. इसके लिए डीएम को कहा गया है कि वे अपने स्तर से इस पत्र जाँच कराएं. आयोग के इस निर्देश के बाद राजनीतिक दलों के लिए दागी प्रत्याशियों को चुनना आसन नहीं होगा |