वाह रे बिहार : खर्च डेढ़ सौ, भुगतान होगा 51 रुपया, मास्टर साहब की उड़ी नींद क्वारेंटाइन सेंटर के बजट से

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बिहार में करीब 30 लाख प्रवासी बिहारी  आए थे इस मुश्किल भरी घरी में और उन्हें क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया था और यह सब बिहार में करीब 2 महीनो से अधिक तक चला था और इसमें प्रवासी बिहारियों को अच्छा सुविधा मुहैया करने को लेकर सरकार ने अपनी पूरी जान लगा दी थी और इसमें लाखो खर्च आय लेकिन इसमें लगे बजट में अब भरी कन्फूजन हो रह है आलम यह है कि इस कन्फ्यूजन से न सिर्फ प्रधानाध्यापक परेशान हैं बल्कि अधिकारियों के लिए भी यह समझ से परे है. बिहार में आपदा प्रबंधन की देखरेख में लगभग 350 क्वारंटीन सेंटर संचालित हो रहे हैं जिसका जिम्मा स्कूल के हेडमास्टर साहब को दिया गया था और निगरानी का जिम्मा बीडीओ और सीओ को दिया गया था.

 

हैरानी की बात तो यह था की एक लोग पर हेडमास्टर साहब के अनुसार दो टाइम का खाने में सबसे पहले नास्ता था फिर दो टाइम खाने में चावल दाल भुजिया आचार पेपर सभी तरह की सब्जी सलाद भुजिया आदि शामिल था लेकिन अब आपदा विभाग के बजट ने उन्हें परेशान कर दिया है परेशानी हो भी क्यों नहीं क्योंकि आपदा विभाग ने ये स्पष्ट ही नहीं किया कि एक व्यक्ति पर कितनी राशि खर्च होगी. जब भोजन की राशि भुगतान की बारी आई तो अब हेडमास्टर से 51 रुपये की दर से डीपीओ मध्याह्म भोजन ने बिल जमा करने आदेश निर्गत कर दिया है. हेसमेस्टर साहब का कहना है की एक थाली में करीब 100 रुपए तक खर्च हुआ है लेकिन हमें भुगतान सिर्फ 51 रुपए ही दिया जा रहा है

 

क्वारेंटाइन सेंटर शुरू होते वक्त कई जिलों में बीडीओ और सीओ ने पत्र जारी किया था जिसमें 100 रुपये भोजन और 25 रुपये नाश्ता पर खर्च बताया गया था लेकिन बाद में इससे भी इंकार कर दिया गया और राशि घटकर 51 हो गया. ऐसे में जहां हेडमास्टर परेशान हैं वहीं बीडीओ और सीओ को भी समझ नहीं आ रहा है कि 2 माह में खर्च हुई राशि की भरपाई कौन करेगा