बिहार के इस जिला में लगता है सबसे बड़ा नाव का मंडी, विदेशो से भी आते हैं खरीदार

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पानी में नाव एक सबसे अहम परिवहन का माध्यम है नाव के माध्यम से आप किसी भी नदी समुद्र में एक जगह से दूसरी जगह बड़ी आसानी से जा सकते हैं। वहीं अगर नाव की बात हो तो आपने सुना होगा कि बिहार में भी अब नाव एक बड़ा कारोबार करता है क्योंकि आपको बता दूं कि बिहार में गंगा नदी के अलावा बिहार में कई नदियां हैं बड़ी नदियों में नावों का परिचालन भी किया जाता है लेकिन क्या आपको पता है बिहार में एक ऐसा प्रसिद्ध नाव मंडी है जहां पर भारत से बाहर के लोग भी नाव खरीदने आते हैं।

दरअसल आपको बता दूं कि यह नाव का मंडी बिहार के बेगूसराय में स्थित है। यह मंडी इन दिनों सुर्खियों में इसलिए है क्योंकि यहां पर अब कई पड़ोसी राज्य अपने जरूरत के अनुसार नाव खरीदने आते हैं। आपको बता दूं कि जैसे मानसून की शुरुआत होती है ऐसी बेगूसराय जिले के गढ़पुरा में नाव की मंडी सजने लगती है। यह मंडी मानसून आते ही ग्राहक को लुभाती है बताया जाता है कि उत्तर बिहार में बैसे तो कई इलाकों में नाव खरीदने की होती है लेकिन गढ़पुर नाव के लिए ज्यादा बेहतर माना जाता है क्योंकि यहां के नाम टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण भी माना जाता है।

यह की नाव को जामुन की लकड़ी से बनाई जाती है और जामुन की लकड़ी पानी में भी अधिक टिकाऊ होती है। इसके अलावा आप यहां पर नाव 24 घंटे खरीद सकते हैं नाव बनाने वाले कारीगर बताते हैं कि अप्रैल माह महीने से नाव बनाने का काम शुरू किया जाता है और नाव अलग-अलग प्रकार के बनते हैं। जिसमें पता नहीं एक पटिया पटिया सहित छोटे और बड़े ना बनाए जाते हैं नाव बनाने वाले काम में अधिकांश बढ़ ही समाज के लोग ही है।

अगर इस नाव की कीमत की बात करें तो इस नाव की कीमत बनाने वाले बताते हैं कि जब एक बढ़िया पटिया की कीमत करीब ₹15000 है। वहीं पतामि नाव की कीमत ₹20000 और 13 हाथ की पतामि नाव की कीमत ₹25000 में बिकती है। आपको बता दूं कि इस प्रकार की नाव खरीद कर लोग अपना रोजगार ही चलाते हैं।